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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 90,अगस्त(प्रथम), 2020

दहेज तू कैसा बीज है रे ?

शिबू टूडु

होश संभाला है जबसे सुनता आया हूँ, तेरी कहानी माँ-बाप के मुँह से, तेरे कारण ही दीदी की शादी टूटी थी। और हाँ दादी ने बताया था तेरे कारण ही सुधा गली की लक्ष्मी जली थी। क्या सचमुच में तुझे कोई नहीं जानता ? जब पूछा माँ-बाप से तेरे अस्तित्व का कारण, जवाब नहीं मिला चला मैं दादाजी के पास पर तू... कब जन्मा कैसे जन्मा नहीं था- जवाब उनके पास भी? दहेज तू कैसा जीवट बीज है रे तेरे बारे में किसी को कोई पता ही नहीं, इस धरती के लोग हर नये वाइरस को पकड़ने में माहिर हैं, पर मानना पड़ेगा तू चीज है ..... अब तक भारतीय लोग अँधेरे में तीर मार रहे हैं। अब यहाँ कोई नहीं है कम-से-कम मुझे कान में बता दे अच्छे-अच्छों को तुम काबू में कैसे कर लेते हो ? सुना है,तुम लड़के वाले को खुश और लड़की वाले को नाखुश करते हो। दहेज सच बता दे तू क्या चीज है, डॉक्टर, नर्स, वैज्ञानिक, सब तेरे सामने नत मस्तक हैं तेरे सामने सब डिग्रियाँ धरी की धरी रह जाती हैं आखिर तू कब भागेगा भारत भूमि से, हर भारतीय के मन से? बताओ, तू कब ओझल होगा भारतीयों के मस्तिष्क से ? जबतक तू बताएगा नहीं मैं पूछता रहूँगा दहेज तू कैसे बीज है, रे ?


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