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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 90,अगस्त(प्रथम), 2020

रिश्तों की हरियाली

रेखा पारंगी

बिना प्यार के होते रिश्ते बेमानी प्यार, स्नेह और त्याग है निशानी जिससे अपनापन वहां होती रिश्तों में हरियाली। जीवन में बिना प्यार के नहीं कोई नाता प्रेम के बीज बोने से चमकता हर रिश्ता। मानवता और इंसानियत सीखाता आपसी सामंजस्य और स्नेह बढ़ाता। हरियाली से निखरता हर रिश्ता त्याग और समर्पण से खिलता। जहां प्रेम नहीं वहां बंजर मन रिश्तों की हरियाली से निखरता मन। स्नेह की क्यारी लगाकर प्यार बढ़ाएं आओ मिलकर सब रिश्तों को महकाए।


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