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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 90,अगस्त(प्रथम), 2020

ऋतुओं की रानी बरसात

राखी पटेल

बरसात है ऋतुओं की रानी, चारों तरफ बरसा है पानी, लोगों ने है छतरी तानी।। बारिश का हम लुत्फ़ उठाएँ। सब मिलकर बच्चे बन जाएँ काग़ज़ की हम नाव चलाएँ। मिट गई मन की ख़ुश्की सारी।। ‘छु’ हो गई गरमी सारी। मारें हम मिलकर किलकारी।। बारिश का मौसम है आया। मज़ा आ गया तगड़ा भारी। आँखों में आ गई खुमारी।। नभ में काले बादल छाये, नाचे मोर पंख फैलाए, कोयल मीठे गीत सुनाये।। झूम उठे हैं सब किसान, सब खाएं मीठे पकवान। सबका हो इससे कल्याण, क्या निर्धन क्या धनवान।। वर्षा ख़ुशहाली फैलाती है, कुछ देने का संदेश सुनाती है। इसे सुने हम इसे गुने हम, वर्षा जैसा सरस् बनें हम।।


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