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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 90,अगस्त(प्रथम), 2020

काल

राजीव डोगरा 'विमल'

मैं तूफानों से निकला हूं मुझे आंधियों से अब कोई डर नहीं, मैं महाकाल से मिला हूं मुझे काल से अब कोई डर नहीं , मैं अपने अस्तित्व को मिटा चुका हूँ, मुझे जीवन से अब कोई मोह नहीं। मैं माँ काली से प्रेम पा चुका हुँ, मुझे दुनिया वालों से अब कोई स्नेह नहीं।


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