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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 90,अगस्त(प्रथम), 2020

मन को एक कॉपी की तरह बनाओ

जया सिंह

मन को एक कॉपी की तरह बनाओ बेहतरीन इबारतें लिखों और मिटाओ। पन्ने उतने ही हैं जितने जिंदगी के दिन फ़िर सुंदर लिखावट में जिंदगी का फ़लसफ़ा व्यक्त करने से क्यों घबराओ मन को सिर्फ रफ़ कॉपी ही बनाओ। क्योंकि आज की लिखी इबारत अगर कल लागू ना होये तो उसे मिटाओ। फ़िर नए दिन के लिए नया कुछ लाओ फेयर कॉपी की तरह मन को मत सजाओ क्योंकि वहाँ सुधार की गुंजाइश नहीं लिखा हुआ काटा तो कॉपी पर दाग पन्ना फाड़ा तो जिंदगी के दिन गवाओं। जिंदगी कभी फेयर नहीं बन सकती उसके किस्से समसामयिक होते हैं। इस लिए रफ़ की तरह जीवन का गणित सुलझाने के लिए उसे प्रयोग में लाओ। पन्ने रंगते रहो और जिंदगी को सजाओ


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