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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 90,अगस्त(प्रथम), 2020

मतदाता की ताकत

हँस राज ठाकुर

मतदाता ही मतदान करेगा, सही नेतृत्व की पहचान करेगा , यदि यह कार्य सही हो गया, तो वो ही जन कल्याण करेगा । अगर कर दी कोई चुक भयंकर, फिर सुधारी नहीं जाएगी , पांच वर्ष तक चुपचाप झेलो,फिर किस्मत संवारी नहीं जाएगी । संचित करके तुम्हारी ताकत , जो कहलाते पहलवान , चाहे हो मनुष्य कितना भी दम्भी , नहीं ईश्वर से बलवान । जीतने वाले की बांछे खिलती, निकलती हारने वाले की जान , हे वोटर तू सोया कहाँ है , अपनी शक्ति को पहचान । वोटर ही है देश की ताकत, जो करता राष्ट्र निर्माण , एक दिन का तू मशीहा रहता, फिर हो जाता है परेशान । अपनी ताकत दूसरों को देकर, क्यों कमज़ोर बन जाता है , ताकत दूसरों को वोही देते हैं, जो सबके भाग्य विधाता है ।

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