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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 90,अगस्त(प्रथम), 2020

कुछ दिनों की बात है मित्रो

हँस राज ठाकुर

वैश्विक महामारी-वैश्विक आपदा, वैश्विक लड़ाई कोरोना से , औषधि जब तक बन न पाए , तब तक रही , ये जाने से । बदल गयी दुनिया, बदल गए मायने , आज सभी के जीने के , कभी हाथ मिलाते, कभी गले लगाते, आज डरते हैं छूने से । हर जगह प्रदुषण चरम पे था , बड़ी मुस्किल थी अब जीने में , प्रकृति ने चैन की साँस ली होगी , कई कील गड़े थे सीने में । लॉकडाउन लगते रहने चाहिए , हर वर्ष - एक महीने में , जटिल समस्याएं, जब ख़त्म होगी , मजा आएगा तभी जीने में । कुछ दिनों की बात है मित्रो , लॉकडाउन समाप्त होने में , कोरोना अभी समाप्त नहीं हुआ , छुपा है कोने कोने में ।

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