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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 90,अगस्त(प्रथम), 2020

जीवन

गरिमा

जीवन क्या है? ये बता दें तू, सारे गमों की दवा दे तू, हंसते रोते कट जाती है ज़िन्दगी, जिन्दगी को जीना सिखा दे तू, धूप छांव में मिट गये जीवन के तजुर्बे, सांस लेना सिखा दे तू, दौलत कमाना तो बहुत आसान है, दूसरे के आंसू पोछना सिखा दे तू, जीना मरना तो एक प्रक्रिया है, मरने के बाद जीना सिखा दे तू, जाओ तो ऐसे जाओ की लोग याद रखें, नाम के लिए काम करना सिखा दे तू, ए जिंदगी जीना सिखा दे तू।।


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