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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 90,अगस्त(प्रथम), 2020

महामारी के इस दौर में

आशीष कुमार वर्मा

महामारी के इस दौर में दुश्वारियां चौखट पर मुंह बाए खड़ी हैं सारी समस्याओं को इस वक़्त मुल्तवी कर दिया गया है समस्या केवल एक रह गई है कोरोना ? प्रकृति के साथ साझे संबंधों की प्रक्रियाओं में कई तरह की गड़बड़ियां की जा चुकी हैं तुम्हारे और हमारे साझे गठजोड़ ने विकास की जद्दोजहद से किसी भी तरह का संकोच वर्जित किया था यहां हर बात वर्जित कर दी गई थी जो मनुष्यता का तकाजा हो यहां विकास कि खेती को रासायनिक खाद से सींचा गया और बढ़ाई गई पैदावार कई गुने तेजी से ताकि लाभ का गणित अपने गुणात्मक रूप में फलीभूत हो सके ।


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