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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 90,अगस्त(प्रथम), 2020

हे हाय हैलो

अजय एहसास

हे हाय हैलो हे हाय हैलो, तुम कुछ तो मेरे साथ चलो हे हाय हैलो हे हाय हैलो, तुम कुछ तो मेरे साथ चलो । दुनिया भर से तो हैलो हाय, घरवालों को करते हैं बाय हम दोस्त बनाते हैं बाहर, घरवालों पर बरसें जमकर अपनों में अपनापन न दिखे, बस हैलो हाय हमनें सीखे बस मैसेज करना अब छोड़ो,अब लें हाथों में हाथ चलो हे हाय हैलो हे हाय हैलो, तुम कुछ तो मेरे साथ चलो । अब गुरू शिष्य का क्या नाता,बस हैलो हाय उनको भाता कोई सलाम ना हो प्रणाम, गुड मॉर्निंग के मैसेज तमाम वो भूल रहे हैं संस्कार, मां बाप की सीखें हैं बेकार मोबाइल रख लो जेब में अब, बूढ़ी मां को तुम थाम चलो हे हाय हैलो हे हाय हैलो, तुम कुछ तो मेरे साथ चलो । थैंक्यू को थिंक यू बना दिया, और सर को सार है लिख डाला पढ़कर गुरुवर आश्चर्यचकित, कैसे शिष्यों से पड़ा पाला विडियो टिक टाक बना करके, सब सत्यानाश ही कर डाला मैसेज करते हैं गुरू जी को, और कहते हैं दिलदार चलो हे हाय हैलो हे हाय हैलो, तुम कुछ तो मेरे साथ चलो । कोई कहता है हैलो डियर, कोई कहता आओ नियर ही करके दांत दिखाते हैं, और ज्ञान की बात बताते हैं जो खुद पर ना लागू करते, वो ही सबको समझाते हैं कुछ अच्छी बातें भेजें जो, जीवन में उसे उतार चलो हे हाय हैलो हे हाय हैलो, तुम कुछ तो मेरे साथ चलो । देखो इतने टैलेंटेड हैं वो विडियो कालिंग करते हैं घर बूढ़ा बाप है खांस रहा, पानी देने में मरते हैं मोबाइल में इतने उलझे, मां बाप किनारे करते हैं अस्तित्व तुम्हारा जिनसे है उनके दामन तुम थाम चलो हे हाय हैलो हे हाय हैलो, तुम कुछ तो मेरे साथ चलो । मां को ना सहारा दे पाते,ना उसकी लाठी बनते हैं नेटवर्क को पकड़ाने खातिर, खेतों में बैठे रहते हैं चाहे फिजूल का काम करें, वो अतिआवश्यक कहते हैं इंसान हो इंसानों सा रहो,नेकी की गठरी बांध चलो हे हाय हैलो हे हाय हैलो, तुम कुछ तो मेरे साथ चलो । ये ह्वाट्सप इन्सटा फेसबुकिया,इसको ही समझते सब दुनिया बाहर जब इनसे निकलोगे, तब ही गिर गिर कर सम्हलोगे पीड़ा कोई अपनी सुना रहा, कोई विडियो उसकी बना रहा दस वर्ष पुराना समय कहे, 'एहसास' हमारे साथ करो हे हाय हैलो हे हाय हैलो, तुम कुछ तो मेरे साथ चलो ।

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