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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 90,अगस्त(प्रथम), 2020

छन्न पकैया

प्रिया देवांगन "प्रियू"

छन्न पकैया छन्न पकैया , माँझी नाव चलाये। आने जाने वाले सब को , नदिया पार कराये।। छन्न पकैया छन्न पकैया , नैय्या डगमग डोले। बैठे है सब सहमे सहमे , खेवें हौले हौले।। छन्न पकैया छन्न पकैया , चलती जीवन नैय्या। महँगाई की मार बहुत है , नाचे ताता थैय्या।। छन्न पकैया छन्न पकैया , नदिया बहती रहती। चलती है वह शांत भाव से , कभी नहीं कुछ कहती।। छन्न पकैया छन्न पकैया , हुई नदी अब पतली। नाव चलाकर बच्चे खेले , सभी पकड़ते मछली।।

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