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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 90,अगस्त(प्रथम), 2020

उसकी महफिल से निकाला गया

अजय प्रसाद

उसकी महफिल से निकाला गया कुछ इस तरहा मुझे संभाला गया । मैं तो डूब चला था इश्क़ में उसके मुझे अच्छी तरह से खंगाला गया । आपको तरक्की मुबारक हो हुजूर छिना तो गरीबों का निवाला गया । जिन हादसों में लोग जान गंवाते हैं मुझे उन्हीं हादसों में है पाला गया । वक्त हमेशा से ही रहा मेरे खिलाफ मेरे हर आज को कल पे टाला गया। खुदा भी खुश है अपनी कामयाबी पे था बला अजय जिसको टाला गया ।

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