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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 90,अगस्त(प्रथम), 2020

हक़ीक़त क्या है दुनिया को भी बता

अजय प्रसाद

हुस्नोइश्क़ के अलावे है कुछ, तो सुना हक़ीक़त क्या है दुनिया को भी बता । आशिकों की अक्ल आ गई है ठिकाने न दिखी लैला और न कोई मजनूँ दिखा । दिल लगाते हैं ये अब दिमाग दुरुस्त कर न करते वफ़ा हैं और न कहतें हैं बेवफ़ा । जब भी मौका मिलता हैं मिल लेते दोनो न शिकवा है किसी से न कोई है गिला । प्यार कितना प्रैक्टिकल हो गया है यारों हो गया प्यार उसी से जो वक्त पर मिला । यही खासियत है इस दौर के आशिक़ो में भूला देता है उसको जो उसे नहीं मिला।

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