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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 66, अगस्त(प्रथम), 2019

आदमी हूं आदमी से प्यार करता हूं

सुरेश सौरभ

प्यार पर कोई टैक्स नहीं, कोई जीएसटी नहीं, इसलिए मैं आदमी हूं, आदमी से प्यार करने की कुदरदी कवायद में लगा हूं।अगर मैंने ऐसा किया है तो इसमें सबको मेरा सपोर्ट करना चाहिए,पर कुछ नामुराद मेरे प्यार को वायरल करने पर आमादा है। इन्हें मेरे सम लिंगी प्रेम पर चिंतन मनन करना चाहिए। मेरे प्रेम को बौद्धिक वर्ग अगर अपना पूरा समर्थन प्रदान कर दे,तो भारत में विकराल रूप से बढ़ रही जनसंख्या वृद्धि पर खासा नियंत्रण लगाया जा सकता है, लेकिन मुझ जैसे अमन-प्रेम पसंद, लाल लंगोटे वाले नेता पर जाने क्यों लोग कीचड़ उलीचे जा रहे है, तेली का तेल जले और मशालची का गुर्दा फेफड़ा। अगर मैं किसी संगठन का प्रमुख पदाधिकारी रहते हुए,आदमी रहते हुए किसी आदमी से जी भर कर प्यार कर लिया,चुम्मा-चाटी कर लिया तो इसके कोई न कोई राष्ट्रवाद के ठोस कारण जरूर रहे होंगे ,उन कारणों को पहले लोग जाने फिर मेरी इज्जत का रुहआफ्जा बनाएं।

कायदे से तो मेरे हौसले और दिलेरी से लोगों को प्रेरणा लेनी चाहिए। मुझ से प्रेरित होकर तमाम कुंवारे लाभान्वित होंगे। और शादी ब्याह की चौरासी कोसी परिक्रमा से निजात पा सकेंगे। हजारों लाखों बचा सकेंगे, पर कुछ विपक्ष के चिरकुट लोगों को मेरी यश कीर्ति से बहुत जलन-कुढ़न हो रही है, इसलिए मेरे निश्छल प्रेम की अभिव्यक्ति पर उंगलियां उठा कर अपनी अयोग्यता का प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसे अयोग्य व्यक्तियों की टीका टिप्पणियों से मैं कतई डरने वाला नहीं हूं। जिसको जो बन पड़े वो करें ,पर मेरे प्रेमचार को अभी तक न कोई रोक पाया है, और न कोई आगे रोक पायेगा ,इसके लिए चाहे जितनीं भी देशी विदेशी शक्तियां सक्रिय हो जाएं, पर मेरा कुछ बिगाड़ न पायेंगी,जो लोग मुझे बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं उन्हें मेरे सच्चे प्रेम के आगे एक न एक दिन नतमस्तक होना पड़ेगा। मैं सोशल मीडिया से कतई नहीं डरने वाला, जो लोग मेरे फोटू सोशल मीडिया पर डाल-डाल कर मुझे परेशान कर रहे हैं, वे इस बात को बहुत अच्छी तरह से अपने भेजे में डाल लें कि घोड़े की पिछाड़ी से नेता की अगाड़ी हमेशा बचना चाहिए।अन्यथा ऐसी दुलत्ती मारुंगा कि आगे पीछे की सारी नस्लें मेरा भजन करेंगी।


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