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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 66, अगस्त(प्रथम), 2019

उम्र‌ ही तो है

नरेश गुर्जर

उम्र‌ ही तो है, गुज़र‌ जाये तो क्या
मुझको मोहब्बत‌ सही, गर‌ ना मिल‌ पाये तो क्या 

की है इबादते यार‌ के दर‌ पे ख़ुदा मान‌ उसको 
ख़ुदा फिर‌ भी अगर‌ ना मिल‌ पाये तो क्या 

जल‌ जाये चिराग‌-ए-मोहब्बत‌ बस‌ इक‌ यार‌ के दिल‌ में 
कहीं और‌ ना फिर‌ जल‌ पाये तो क्या 

करते हैं जां-निसार‌ हम‌ यार‌ की खा़तिर‌ 
यार‌ फिर‌ भी यार‌ ना बन‌ पाये तो क्या 

रूह‌ जब‌ जिस्म‌ से निकल‌ जाये "नरेश‌"
जिस्म‌ को कोई‌ आग‌ लगाये भी तो क्या 
  

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