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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 66, अगस्त(प्रथम), 2019

कभी मेरी धड़कन का भी ध्यान रख

बलजीत सिंह बेनाम

                  
ज़ियादा न मुश्किल का इम्कान रख
नज़र में नए रोज़ सौपान रख

सदा तूने औरों की धड़कन सुनी
कभी मेरी धड़कन का भी ध्यान रख

वो तेरा सनम या कोई ग़ैर है
मोहब्बत में इतनी तो पहचान रख

वफ़ाओं के रोशन सदा दीप कर
कभी दिल की राहें न सुनसान रख

अभी रस ज़माने में बिखरा कहाँ
कहा किसने उपनाम रसख़ान रख
  

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