मुखपृष्ठ
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 66, अगस्त(प्रथम), 2019

मजा दर्द में ही अब आने लगा

डॉ०अनिल चड्डा

मजा दर्द में ही अब आने लगा, खुशी का पल भी रुलाने लगा सोचते रहने से क्या फायदा, अनहोनी का डर सताने लगा। गुरुर था अपनी मोहब्बत पर, वो बेवफा बन मुझे चिढ़ाने लगा। कहीं भी रास्ता ले जाएगा अब, बेवजह मैं सपने बनाने लगा। गिरते-संभलते उठते-चलते, जीवन से रिश्ता निभाने लगा।


कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें