मुखपृष्ठ
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 66, अगस्त(प्रथम), 2019

नालायक इच्छा

राजीव कुमार

पलटू मंडल ने अपने बेटों को सफल बना दिया, मगर प्लानिंग के तहत एक बेटा को अनपढ़ रखा, और असका नालायक नाम प्रसिद्ध कर दिया।

उनका मंझला बेटा हमेशा पूछता ’’ पिता जी, भइया की तरह आप हमको बाहर क्यांें नहीं भेज रहे हैं? ’’

पलटू मंडल कुछ देर चुप रहते और फिर हल्का मुस्करा कर कहते ’’ बेटा, बड़े और छोटे को जाने दो बाहर कमाने, सारा राजपाट तो तुम्हारा ही है। ’’

उधर पलटू मंडल के बड़े और छोटे बेटे ने सुनगुन ली और आंकड़ा बैठा लिया और सुलह किया ’’ बाहर सिर्फ अपना पेट भर पाएंगे लेकिन कहीं इतनी बड़ी जायदाद रौशन के नाम न हो जाए। ’’ यही सोचकर पढ़े-लिखे बेटे भी बाहर काम की तलाश करने नहीं गए।

इधर पलटू मंडन माथा पीटते हैं और कहते फिरते हैं कि ’’ इन नालायकों से तो मैं बेऔलाद अच्छा रहता। ’’


कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें