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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 66, अगस्त(प्रथम), 2019

ट्रंप के झूठ पर...

विश्वम्भर पाण्डेय 'व्यग्र'

यद्यपि कई बीमारियों का घर हैं मेरे दोस्त का शरीर 

जाँच में आज सामने आया कि वो झूठ भी बोलता है 

आदमी की ताक़त शायद इतनी खतरनाक नहीं होती

जितनी खतरनाक होती उसकी झूठ बोलने की आदत

बच के रहना झूठ से और झूठे व्यक्ति से 

उसका पल भर का भी साथ गजब ढ़ाता है ।

तन के गोरे मन के काले कुछ लोग हुआ करते हैं 

जैसे शिकारी के जाल में अंदर पड़े अनाज के दाने ।
  

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