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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 66, अगस्त(प्रथम), 2019

खुशियां बटोरिये----तालियां नहीं

वीरेंद्र कौशल

एक कवि मंच पर कर रहा था कविता पाठ बता रहा था लोगों को कंगाल रहते हुए भी जीवन में कितने ठाठ जीवन में पढ़ लो चाहे कितने नैतिकता के पाठ आपने अपने जीवन में गर लेनी भरपूर मौज़ आप ले सकते हैं उसे हर रोज़ न मिले तो लीजिये तुरंत खोज परंतु एक सीधा व सरल है उपाय तुरंत लीजिये उसे बिन देरी के अपनाए अपने जीवन में सदा खुशियां बटोरिये तालियां नहीं क्योंकि तालियां दिमाग़ ख़राब करती हैं खुशियां सदा झोलियां ही भरती है खुशियां सदा झोलियां ही भरती है


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