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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 66, अगस्त(प्रथम), 2019

नेत्रहीन

सुनील मिश्रा 'शोधार्थी'

नेत्रहीन आदमियों के जीवन में अदम्यता के साथ लड़ने का अप्रबल साहस उनके सांसों की जादुई उजाले में श्रम की दीपशिखा की लौ जलते हुए आंच के साथ बह रही हैं। उनके लिए हिमाचल भी बावना नज़र आने लगा हों और जीवन की साधनाएं करते हुए सुगंध भर देने वाली सृष्टि की ऊर्जा शाश्वता के साथ अपने मर्म में दबकर भी स्वयं को जाग्रत करती हुई जीवन के विजय रथ पर पताका फहराना चाहते हों....


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