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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 66, अगस्त(प्रथम), 2019

किसान

सुनील मिश्रा 'शोधार्थी'

हर रोज उम्मीद भरें भूख से छटपटाते चेहरे निरीहता के साथ ताकतें सरकार के वादे-कायदे कानूनों में जलती हुई मोमबत्ती की तरह गलते- गलते आत्मा की सिसकारियां में डूबता हुआ सूरज जिंदगी की सांझ में दुःखमयी घटनाएं सैकड़ों बार किसानों ने शोक की रस्सी में मृत्यु से झूल गये...


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