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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 66, अगस्त(प्रथम), 2019

सांप्रदायिकता

शंकर सिंह

वो बिलकुल चूक नही करेंगे यकीनन हर दौर मे तुम्हें ही बचना होगा वो आएंगे भेड़ियों के झुंड मे शहर/गली/नुक्कड़/घर उन तमाम जगहो पर जंहा संवेदना पनपती है या जिन्हें तुम हम सुरक्षित समझते आये है उन जगहों पर पनप जायेंगे या फिर काबिज हो जाएंगे मानवी सभ्यता पर जंगल के सिद्धांतों पर राज करेंगे तुम्हे हमें आदेश देंगे धर्म का और झोंक देंगे सांप्रदायिकता के दंगल मे बचना तुम्हें हमें खुद ही होगा हर दौर की तरह इस दौर मे भी ।


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