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Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 66, अगस्त(प्रथम), 2019

सोने की चिड़िया

शबनम शर्मा

सोने की चिड़िया कहलाने वाला, ऋषियों का देश बतलाने वाला, यह भारत देश क्या से क्या हो गया, सोना मिट्टी बनता चला गया, और ऋषि चंबल में जाते चले गये। संस्कृति जो संसार का मुकुट कहलाती थी, सौम्य, सभ्य और सिमटी सी थी, आज कितनी छिछली, घिनौनी बनती जा रही है। देश की नारी, पुरुषों से लगाई दौड़ में, अपना पूजनीय स्थान खोती जा रही है। जी चाहता है, मेरी बात कोई समझे, कि इस धरा पर सिर्फ मानव जन्म लेता है, हिन्दू, मुस्लिम, सिख, इसाई नहीं। फसादों में खुद को फंसा के कितना खुश होता है ये आदमी और सोचता ही नहीं कि हर किसी शर्त पर, सिर्फ आदमी को खोता है आदमी, छोड़ पराये चक्करों को असलियत पर आना होगा अमन, शांति और अहिंसा अपनाकर भारत को फिर से सोने की चिड़िया बनाना होगा।


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