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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 66, अगस्त(प्रथम), 2019

ये जीवन अनमोल है यारों

शबनम शर्मा

ये जीवन अनमोल है यारों, मिलता नहीं बारम्बार है, तुम इसे खुशहाल बना लो, यही अरज़ हमार है। तन की हवस मिटाने वालों, बोलो परस्त्री, परसंग को दूर से ही नमस्कार है तुम इसे खुशहाल बना लो, यही अरज़ हमार है। लगाम दिल की कस कर थामो, नज़रें कभी न मैली न हों, हवस के आगे झुको कभी न, यही प्रार्थना हमार है ये जीवन अनमोल है यारों मिलता नहीं बारम्बार है। सात फेरों का बंधन जानो, घर में ही तुम स्वर्ग पहचानो, देखो, ज़रा प्यार से ऐसे कि मुन्ना-मुन्नी करे दुलार है ये जीवन अनमोल है यारों मिलता नहीं बारम्बार है। रहें समाज में मूंछ तान कर, माने तुम्हें सब सरदार हैं, देख तुम्हें फिर आगे-पीछे, सुधरे सब संसार है, जीवन सदा सुखी रहे तुम्हारा, ये ही अरज़ हमार है, ये जीवन अनमोल है यारों मिलता नहीं बारम्बार है। कसम खाओ आज हमारे संग, क्षणिक सुख के लिये न फिसलोगे तुम, देख किसी भी मौके को टपके न तुम्हारी लार है ये जीवन अनमोल है यारों, मिलता नहीं बारम्बार है। तुम मर्दों से देश की ताकत, डरता सब संसार है, छोड़ क्षणिक सुख, भोगो जीवन, जो मिलता नहीं बारम्बार है तुम इसे खुशहाल बना लो ये ही अरज़ हमार है। स्वर्ग सा नशाहीन समाज हो, आओ छोड़ें सब नशा, यही प्रण आज हो।


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