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Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 66, अगस्त(प्रथम), 2019

मां के आंचल में सो लूं

रौली मिश्रा

सपनों की दुनिया में जाना चाहतीं हूं,
मां के आंचल में सोना चाहती हूं,
हर खुशी गम की बातें मां से कह लूं,
मां के आंचल में सो लूं।।

मां की लोरी सुनना चाहती हूं,
फिर उस बचपन को जीना चाहती हूं,
अब उनका हर कहना मानती हूं,
खुश रहने की सीख मुझे दे दी,
अब उनके हर दर्द को मैं बांट लूं,
मां के आंचल में सो लूं।।

नाराजगी हों चाहे जितनी मुझसे,
हर पल उनका खास बनाना चाहती हूं,
उनकी मुस्कुराहट को आंखों में भर लूं
मां के आंचल में सो लूं।।

वो मुस्कराती रहे हमेशा,
ऐसी दुआ में कर लूं,
वो रहे सामने हमेशा,
ऐसा सपना मैं सच कर लूं
मां के आंचल में सो लूं।।
  

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