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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 66, अगस्त(प्रथम), 2019

मेरे सच्चे दोस्त हैं

पवनेष ठकुराठी ‘पवन’

विभिन्न रंगों की कलमें
जो मेरे हाथों को ही नहीं
बल्कि
जीवन को भी
गति प्रदान करती हैं। 

किताबें
जो मेरे ज्ञान को
समृद्ध करती हैं
देती हैं प्रेरणा
आगे बढ़ने की। 

और वे कागज के पन्ने
जिन पर मैं अपने 
अनुभवों, विचारों को उकेरता हूँ
उड़ेल कर रख देता हूँ
अपना संपूर्ण हृदय। 
  

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