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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 66, अगस्त(प्रथम), 2019

लक्ष्य कैसे पाएंगे....?

आशीष श्रीवास्तव

लक्ष्य तो साधा ही नहीं, सफलता कैसे पाएंगे
योजना कुछ बनाई नहीं, मंजिल कैसे पाएंगे

सही पथ का चयन करके
इच्छा शक्ति बढ़ाना होगी
मार्गदर्शन लेकर हमें
रणनीति बनाना होगी

विश्वास जो सोया रहा, निर्णय कैसे ले पाएंगे
फूल तो उगाए नहीं, सुगंध कैसे पाएंगे

करना है सार्थक जीवन
तो परिश्रम करना होगा
ऊंचा उठने के लिए
कड़ा संघर्ष करना होगा

बिना अभ्यास के हम-तुम, कैसे जीत पाएंगे
खेतों को जो भुला दिया, रोटी कैसे पाएंगे
सीखना होगा कौशल हमें
दृढ़ संकल्प लेना होगा
शक्तिशाली विचारों संग
धैर्य भी रखना होगा

डर निकाला न जो मन से, आगे कैसे बढ़ पाएंगे
पेड़ तो लगाए नहीं, फल कहां से हम पाएंगे

स्वप्न साकार करना है
तो प्रेरणा लेना होगी
कष्ट भी भोगना होगा
तैयारी रखना होगी

घबराके जो पीछे हटे, नवाचार न कर पाएंगे
गांव तो पीछे छोड़ दिए, प्रेम सच्चा कहां पाएंगे

लक्ष्य तो साधा ही नहीं, लक्ष्य कैसे भेद पाएंगे
योजना कुछ बनाई नहीं. मंजिल कैसे पाएंगे।

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