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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 66, अगस्त(प्रथम), 2019

रात ,रजनी

अशोक कुमार ढोरिया

   
  1.

अंधेरी रात
टिमटिमाते तारे
लगते प्यारे

  2.

छिपा सूरज
मुस्कराई रजनी
छाया अंधेरा

  3.

बीती रजनी
छट गया अंधेरा
हुआ सवेरा

  4.

शीतल रात
ठिठुरता चंद्रमा
तारों के साथ

  5.

पूनम रात
धवल हुई धरा
खिली चाँदनी

  6.

चंद्र किरणें
करती अठखेली
जल थल में
  

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