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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 66, अगस्त(प्रथम), 2019

अव्वल ख़ारा पानी है

रोहिताश्व मिश्रा 'रौनक़'

दश्त की जो वीरानी है। कुछ जानी पहचानी है। लहरों की शोख़ी का सबब, साहिल की उरियानी है। दरिया, वरिया दोयम हैं, अव्वल ख़ारा पानी है। इश्क़ का चक्कर है शायद, सब कुछ धानी धानी है। प्यास तो उसने बाद में दी, पहले बख़्शा पानी है। जो भी है सब उसका है, अपनी 'रौनक़' फ़ानी है।


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