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Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 66, अगस्त(प्रथम), 2019

अब ननकऊ की दुल्हिन तबै आई ! इज्जत घर जब बनि जाई…..

राज कुमार तिवारी (राज)

नीम के चबुतरे पर बैठे और मैला मैला गमछा अपने कांधे पर धरे ! एक हाथ अपने सर पर और दूसरे हाथ से बांस की लाठी पकडे बैठे 70 वर्षीय झल्लर काका किसी चिन्ता में डूबे हुये थे ? तभी गांव के बैजू साईकिल से डाक्टर के वहां से दवाई लेकर आ रहे थे झल्लर काका को चिंता में डूबे देख कर बैजू झल्लर काका से पूछने लगे अरे ! काका चौरा पर अकेले बैठे -बैठे का सोंच रहे हव ? लम्बी सांस खींचते हुये काका बोलो - अरे बैजू ! का बतई ! ऐसी दुदर्शा गांव की कभी नाही भई ! हमका जान परत है कि गांव को केहुकी का नजर लग गयी है ! ई गांव का कऊ नऊ घर बाकी नाही है जी घर मा एक दुई बीमार न पडे हुंअय ! बरीखा का पहिल दाउंगरा का गिरा मानौ गांव पर काल बरसि गवा है ! बैजू भी काका के साथ नीम के चौरा पर बैठते हुये बोले - हां काका बात तो सही कहि रहे हव ! हमरी इ जिन्दगी मा इ पहिली बार है इ गांव गांव नही लागत है ! जान परत है कि मरीजन कय अड्डा है ! चार दिनन से हम अपने घर की दवा लावत - लावत हमहुं बीमार होइ गयेन है ! उपर से रमझारा काकी हल्ल बोलाये हैं। बैजू की ओर निहारते हुये झल्लर काका पूछने लगे- भला रमझारा तुमका काहे हल्ल किये हैं। बैजू- अरे काका उनहूं के घर मा सब बीमार पडे़ हैं ! उई हमसे तीन दिनन से कहत हैं कि हमरे ननकऊ के साथे उके ससुरार चले जाउ ! और उकै मेहरारू बिदा करा लाउ ! काका बोले - ईमा का परेशानी है जाउ ! चले जाउ ! उकै पतोहिया लेवाय लाउ ! भला वोहु कै घर मा कोई रोटी बनावय वाला तो होइ जाई ! वोह कै घरमा तो सबै मांदे पडे हैं। बैजू बोले - इ बात नाही है काका 10 - 12 दिन पहिले गांव मा डाकिया आवा रहय अउर उ ननकऊ कै दुल्हिन कै चिट्ठी लावा रहय ! झल्लर काका बोले - उकै मेहरारू पढ़ी लिखी हय का ! बैजू बोले - हां काका आउर वा चिट्ठी मां कहि दिहिस है कि जब तक घर मा शौंचालय न बनवइहौ तब तक हम न आइबे। इधर बैजू और काका दोनों में गांव की चर्चा हो ही थी कि तब तक तांगे पर बैठे आ रहे गांव के मुखिया खटपटिया सिंह नीम के चौरा के पास आ कर रूक गये और तांगे से उतरते हुये बोले - अरे काका का हाल है ! बैजू भाई ई दवाई लेहे कहां जात हव ! बैजू बोला - अरे मुखिया जी जाई नही रहे हन ! दवाई लेहे आय रहे हन ! मुखिया जी दोनों हाथों से गले का गमछा नीचे खींचते हुए बोले बोले - अब परेशान हुअयकै कौनउ जरूरत नाही है ! हम शहर मा डाक्टर ये बात करै गयेन रहय अउर बात कै आयेन है ! मुंह से पान की पीच थूंकते हुये मुखिया जी बोले - डाक्टर साहब बोले हैं कि हम पूरे अमले और पूरी तैयारी के साथ कल तुम्हारे गांव में आउंगा बारी - बारी से सभी को दवाई दूंगा। झल्लर काका बोले - अरे मुखिया जी ई बीमारी कय तो दवाई होई जाई मुल रमझारा कय लडि़कवा कय गाउने मा रार पडिगवा है ? मुखिया जी - काहे ! का भवा ! काका बोले - अरे मुखिया जी ननकऊ कय मेहरारू पढ़ी लिखी हय उ अबही कुछ दिन पहिले एक चिट्ठी लिखिस रहय जीमा कहिस रहय कि जब तक घर मा शौंचायल न बनि जाई तब तक हम न अउबय ! मुखिया जी बोले- अरे काका इ बात हमै बहुत दिनन से पता रहा। झल्लर काका- उ कैसन। मुखिया जी काका की तरफ सरकते हुये बोले - काका ! बात ई है कि जब ननकऊ कय मेहरारू ननकऊ कय घर आई ! उकय घर मा बडी धूम धाम रही रात मां गाना बजाना भये ! नकटा सोहर गाये गये हां ! मुल सबेरे घर कय सबै लोग गुम - सुम इधर उधर बैठे रहे ! हम अपनी बाग से लौट रहे रहन ! देखा कि रमझारा काकी के घर मा सबहीं के चेहरा लटकत हय ! हम काकी से पूंछि बैठन ! कि काकी सब ठीक - ठाक तो है ! तब काकी बोली की बेटवा अबही तक तो ठीक रहय ! मुल अब ठीक नाही है। मुखिया जी ने पूछा कि - का भवा ! रमझारा काकी बोली - अरे बेटवा कल ननकऊ की मेहरारू आई ! औ आजय से जबान लड़ावय लाग। मुखिया जी - का काउनउ टकरार भई का सास - बहुरिया मा ! रमझारा काकी बोली - बेटवा बात या है कि बिहान हम उ का जगावा अउर कहा कि दुल्हिन उठव चलव भिनसारेन ट्टटी होइ आई नही तो दिन मा मनई खेतन मा पहुंच जइहैं ! अतनय मा बच्चा ! व बाहेर निकरी अउर बोली ! का इ घर मा शौंचालय नही बना है ! रमझारा काकी मुखिया से बोंली - पुतवा हम शौंचायल कबहुं देखबय नाही भयेन तो कहि दीन नाही बना है ! तव वा बोली हम इ घर मा न रहब ! अरे पुतवा वह कहिस हम आजय चली जाब ! अव इ घर मा तब तक न अइबे ! जब तक शौंचायल न बनि जाई ! इ बात पर हम उते कहा कि दुल्हिन हमार पूरी जिन्दगी यही घर मां बीति गय है ! हम का कबहु दिक्कत नही भय ! इ बात पर वा बोली कि तुम्हारी बीति गय हमार न बीती। मुखिया जी झल्लर काका से बोले - इ है उइ घर की कहानी अउर ननकउ की दुल्हिन चली गय ! अउर घर वालेन से कहि गय ! जब तक घर मा शौंचालय न बनि जाई तब तक हम न अइबै। इ सब बातय हम जानित रहय।

धीरे धीरे सांझ और ढलने लगी परिंदे अपने अपने बसेरे पर लौटने लगे ! इतने पर मुखिया जी चौरा से उठते हुये बोले - अच्छा काका अब चली ! घर मा देखी ! लालटेन वालटेन जली की नाही ! यह कह कर मुखिया जी अपने घर की ओर चल पडे ! उधर बैजू भी दवाई को उठाते हुये और साइकिल पकडते हुये बोले - काका तुमहुं चलव अब काल्हिन सब का बिधवत इलाज होई। यह बात कह कर सभी अपने- अपने घर चले गये रात बीत गई।

दूसरे दिन सुबह गांव में - एक जीप गांव में आई और नीम के चौरा वाले मैदान के पास आ कर रूकी इतने में मुखिया जी आ गये और बोले - आरे डाक्टर साबह आओ हम आपका ही इंतजार कर रहे थे ! अरे कलुवा खटिया बिन्च कुछ लय आवा साहब लोगन कै बैठय खातिन ! डाक्टर साबह बोले- नही नही हम बैठेगे नही - हम आपका पूरा गांव देखना चाह रहें है और साथ में सभी की बीमारी भी देखते चलेगें ! और सभी को दवा भी देते चलेंगें। मुखिया जी बोले अच्छी बात है चलव। सभी लोग डाक्टर साहब के साथ गांव में चलने लगे। डाक्टर साहब- अरे मुखिया जी आपके गांव की गलियों में इतना कीचड़ क्यों है ! पानी तो एक सप्ताह पहले बरसा था ? मुखिया जी बोले - साहब इ बरसात का पानी नाही है ! इ तौ घरन की नाली का पानी है ! जौ गलियन मा बहत हय। डाक्टर बोले – क्या ! घरों का पानी निकालने के लिये घरो में नालियां नही बनी हैं। मुखिया जी बोले - साहब नालियां तो बनी हैं गंदगी से पट गइ अब उनमा पानी निकल नाही पा रहा है इसलिये नालियों का पानी रास्तों में बही जात है। परिहास मुद्रा में डाक्टर साहब बोले - अच्छा ! अच्छा ! और वह घरों के आस पास ढेर क्यों लगे हैं। डाक्टर साहब की ओर देखते हुये बैजू बोला - साहब घरों का कूडा करकट है जानवरों का गोबर है यह सब घर के बाहर बहाय दिया जात है।

इस प्रकार डाक्टर साबह ने पूरे गांव का हाल देख लिया तो डाक्टर साबह ने मुखिया जी से कहा - मुखिया जी गांव के सभी लोगों को एक जगह पर इकट्ठा होनें को कहो हम वहीं पर सभी को दवाई का वितरण करेंगे ! और लोगों से कुछ सावधानियां बरतने के लिये भी कहेंगे । इस पर मुखिया जी बोले ठीक है - मुखिया जी ने सभी को गांव के नीम वाले चौरे पर एकत्र होने को कहा। उधर गांव के सभी लोग चौरे पर एकत्र हो रहे थे इधर मुखिया जी डाक्टर साहब की आव भगत में लगे हुये थे।

धीरे धीरे करके गांव के सभी लोग एकत्र हो गये और अपनी - अपनी व्यथा बताने लगे इतने में डाक्टर साहब बोले - कि मैने सभी की परेशानी देख ली है और कुछ दवाऐं दे दूंगा आप लोग बहुत जल्द ठीक हो जायेगे ! परन्तु इससे पहले एक बात कहना चाहूंगा ! जो आप लोग ध्यान से सुनों ! और उस पर अमल करो ! इस पर गांव के सभी लोग शान्त हो गये डाक्टर की ओर देखने लगे। डाक्टर साहब बोले- देखो गांव में जो बीमारी फैली है वह आप लोगों के द्वारा ही फैलायी गयी है। इस बात पर गांव के सभी लोग एक दूसरे का मुंह देखने लगे। डाक्टर बोले- यदि आप लोग अपने घरों व घर के आस - पास साफ - सफाई नही रखोगें तो इसी प्रकार से बीमारियां फैलती रहेंगी ! यही नही एक इस गांव में हैजा जैसी बीमारी भी पनप सकती है ! हैजा का नाम सुनते ही गांव वाले सन्न हो गये ! उस पर मुखिया जी डर कर बोले - डाक्टर साहब गांव मा हैजा फइल सकत है। डाक्टर साहब बोले - हां फैल सकता किन्तु समय रहते यदि आप लोगों ने जागरूकता का सही प्रयोग किया तो ! इस गांव में कोई बीमारी ही नही आयेगी ! सभी गांव वाले एक साथ बोले- कौन सी जागरूकता ! कैसी जागरूकता ! क्या बीमारी से निपटने का क्या कोई उपाय है ? डाक्टर साहब बोले - हां बिल्कुल है ! आप लोग अपने - अपने घरों की नालियां साफ रखे उसमें गंदा पानी न रूकने दें ! गंदे पानी में मलेरिया जैसे मच्छर पलते हैं ! वही मच्छर आप लोगों को सांझ होते ही काटने लगते हैं ! और आप लोगों को तेज बुखार, उल्टी, दस्त, हाथ पैर में दर्द, तरह तहर की बीमारियां पैदा हो जाती हैं। और ये घरों के पास कूडा करकट लगाने से उसकी दुर्गन्ध आप लोगों के घरों तक पहुंचती है जिससे कई तरह की संक्रमक बीमारियां फैलती हैं इसका सबसे बुरा असर गांव के बच्चों पर पड़ता है ! आप सभी लोग अपने - अपने रहन - सहन को साफ सुथरो रखो और घर का कूडा करकट एक निश्चित स्थान पर घर से दूर रखें ताकि ढेर से उठने वाली दुर्गन्ध और गंदगी में रहने वाले कीडे- मकोडे आपके घरों तक न पहुंच सके ! और गांव को हरा भरा रखने के अधिक से अधिक पौधे लगाये ! पौधे लगाने से क्या होता कि आप लोगों को इससे शुद्ध हवा मिलती है और वातावरण भी शुद्ध रहता है यह सब जब हो जायेगा तो इस गांव में कोई बीमारी ही नही आयेगी। डाक्टर साहब की इस बात से सभी लोग सहमत हो गये और सभी लोगों ने एक संकल्प लिया कि जब तक पूरे गांव को आज साफ नही कर लेगें तक पानी तक नही पियेगें इस बीमारी ने सभी को खूब रूलाया है और आज इसको भगा कर ही रहेंगे।

डाक्टर साहब अभी संकल्प दिला कर अपनी जीप की ओर मुडे ही थे कि - रमझारा काकी आ गई और डाक्टर साहब से बोली कि - साहब आपने पूरे गांव का संकट तव दूर कर दिया है ! एक हमरीव समस्या का समाधान करते जाओ ! डाक्टर साहब रूक कर बोले - माता जी आपको कौन सी बीमारी है ! इस पर मुखिया जी बोले - साबह इनको बीमारी नाही है ! एक लाचारी है ! इस पर डाक्टर साहब बोले - लाचारी ! कैसी लाचारी ! तो मुखिया जी बोले - पैसों की लाचारी साहब ! तो डाक्टर साहब ने कहा कि मैने तो पूरे गांव वालों को दवाई दे दी है किसी से पैसे तक नही मांगे इसमें लाचारी की कोई बात ही नही है। तब मुखिया जी ने पूरी राम कहानी डाक्टर साहब को सुना डाली ! तो डाक्टर साहब ने कहा - अरे भाई यह समस्या केवल रमझारी काकी की नही है ! यह तो पूरे गांव की समस्या है ! सभी के घरों में बहु बेटियां है सभी खुले मैदान में शौंच करने जाती है क्या उनको अच्छा लगता है ! बरसात के दिनों में अनेक तरह के जीव जन्तुओं का भी भय बना रहता है ! अभी कल की बात है मेरे पास रात में एक मरीज आया जिसको किसी जहरीले सांप ने काट लिया था ! पहले तो गांव में ही झाड़ फूंक करवाते रहे ! जब समस्या गंभीर हो गई तो वह मेरे पास लाये ! और बोले साहब इनको बचा लीजिये ! जब तक मै अपना इलाज शुरू करता तब तक बहुत देर हो चुकी थी ! मरीज दम तोड़ चुका था ! इस पर मैने मरीज के परिवार वालों से घर में सांप डस लिया था क्या ! इस पर ओ बोला नाही साहब शाम को लोटा लेकर शौंच को जा रहे थे कि रास्ते में अचाकन सांप ने काट लिया और मरीज की ओर इसारा करते हुये बोला कि ऐ हो गया। तो डाक्टर साहब ने बोला - यह समय केवल रमझारा काकी की नही है यह तो पूरे गांव की और इस प्रकार की समस्या से निपटने के लिये हमारी सरकार 12 हजार की प्रोत्साहन राशि भी दे रही है। सभी ग्रामींणों ने डाक्टर साहब से पूंछा भला वो कैसे - ग्रामीण बोले आपने तो बीमारी का इजाल कर ही दिया है अब हम सब लोगों की लाचारी का उपाय भी बताते जायें। इस पर डाक्टर साबह ने बताया कि - आप सब लोग अपने - अपने घरों में इज्जत घर का निर्माण करें और सरकार से बारह हजार की प्रोत्साहन राशि प्रदान करें ! इस पर रमझारा काकी बोली अब ननकऊ की दुल्हिन तबै आई ! इज्जत घर जब बनि जाई। इस पर गांव के लोगों ने भी रमझारा काकी का समर्थन किया। उधर डाक्टर साहब भी मुस्कुराते हुये जीप पर बैठ कर चले गये। इधर ग्रामींणों ने अपने अपने घरों के पास से गंदगी को हटाना शुरू कर दिया और शौचालय बनाने के लिए गड्ढा खोदना शुरू कर दिया।


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