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वर्ष: 2, अंक18, अगस्त(प्रथम), 2017



भेड़


डॉ. श्रवणकुमार सोलंकी


 		 
भीड़ और भेड़
समान नहीं है
भेड़ श्रेष्ठ है भीड़ से।
भेड़ अंध अनुगामी है
किंतु भेद नहीं करती
हिंदू-मुस्लिम, जात-पात में।
भेड़ बलिदानी है
वह प्राण नहीं लेती
निरपराध का।
भेड़ का कोई लोकतंत्र नहीं
वह चुनती नहीं
गुंडे, मवाली, हत्यारों को।

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