Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 2, अंक18, अगस्त(प्रथम), 2017



कुछ दिन पहले


डॉ कौशल किशोर श्रीवास्तव


 		 
कुछ दिन पहले इस किताब में, महक रहे थे बरक नये
जिल्दसाज तुम बतलाओ, वे सफे सुनहरे किधर गये
जहाँ इत्र की महक रवां थी,जलने की बू आती है
दहशत वाले बादल कैसे,आसमान में पसर गये
बूढ़ा होकर इंकलाब क्यों, लगा चापलूसी करने
कलमों को चाकू होना था, क्यों चमच्च में बदल गये
बंधे रहेंगे सब किताब में, मजबूती के धागे से
एक तमन्ना रखने वाले, बरक बरक क्यों बिखर गए
जिल्दों से नाजुक बरकों को, क्या तहरीर बचाएगी
क्या मजनून बदलने होंगे, गढ़ने होंगे लफ़्ज नए

कृपया अपनी प्रतिक्रिया sahityasudha2016@gmail.com पर भेजें