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वर्ष: 2, अंक 35, अप्रैल(द्वितीय), 2018



आया है मधुमास नया


सुनीता काम्बोज


 
बैरी पतझर बीत गया है
आया है मधुमास नया
धरती लगती नई नई सी
लगता है आकाश नया

मुदित नयन  थे जो कलियों के 
धीरे-धीरे खोल रही
अमलतास की डाली पर अब
कोयल कू-कू बोल रही
लगता नई उमंगे जागी
जागा है विश्वास नया
बैरी----

मन्त्र -मुग्ध हैं भवँरे सारे
गुन -गुन राग सुनाते हैं
कमल ,केतकी ,चम्पा ,जूही
मधुर- मधुर मुस्काते हैं
चिड़िया बुनती लेकर तिनका 
सपनों का आवास नया
बैरी---

गेहूँ की खेतों में देखो
मृदुल बलियाँ झाँक रही
नई कोपलें डाली ऊपर
बैठी सबको ताँक रही
फिरे तितलियाँ दीवानी सी
छाया है उल्लास नया
बैरी---

आम्र मंजरियाँ भी डाली पर
हँसती हैं मुस्काती हैं
मात शारदा इस सृष्टि पर
करुणा ही बरसाती है
महकी है अब सभी हवाएँ
लाई हैं अहसास नया 
बैरी--
   

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