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वर्ष: 2, अंक 34, अप्रैल(प्रथम), 2018



माँ तेरा आँचल बहुत बड़ा


हर्ष कुमार सेठ


 
ला आज हमे जाम पीने दे 
इस महफिल के ना सही तन्हाई के नाम पी लेने दे
क्या पिलाएगा जमाना हमको, ला आज जमाने के नाम पीने दे 
ला आज हमे जाम पीने दे

बोतल में बची है बहुत थोडी शराब अब तो 
ला डाल दे और खाली बोतल के नाम पी लेने दे 
ला आज हमे जाम पीने दे

तंग जज्बातो से उब गया हूं मैं 
ला आज हमे सरेआम पीने दे 
ला आज हमे जाम पीने दे

हर राह पर बना दिये है महखाने बहुत 
आज हमे एक महखाने की एक बोतल का एक जाम पीने दे 
ला आज हमे जाम पीने दे

रूसवां हुये है जो जिन्दगी में हर कदम पर लोग 
ला उन्हीं मेरे हमशक्लो के नाम पीने दे 
ला आज हमे जाम पीने दे

मैं नही डालूंगा ऐ दोस्त जोर तुझ पर बार-बार 
पर मुझे शराब बनाने वाले के नाम पीने दे
ला आज हमे जाम पीने दे

गर जो शराब पीती है आदमी को कुछ कहते है लोग 
फिर तो दोस्त एक नही बे इम्ति‍हां जाम पीने दे। 
ला आज हमे जाम पीने दे


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