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वर्ष: 2, अंक 34, अप्रैल(प्रथम), 2018



नेता जी


मोती प्रसाद साहू



भय दिखलाकर निर्भयता को ले जाते हैं नेता जी।
आग लगे या वज्र पड़े भाषण कर जाते नेता जी।
भीड़ देखकर फूल के कुप्पा हो जाते हैं नेता जी ।
विरल भीड़ से मातहतों पर झल्लाते हैं नेता जी।
हाथ हिला समूह- अभिवादन कर जाते हैं नेता जी।
काला झण्डा देख दूर से मुड़ जाते हैं नेता जी।
मंच पहुॅच कर मालाओं से लद जाते हैं नेता जी।
जनता को जनता जनार्दन कह जाते हैं नेता जी।
मुख से कुछ संकेत अलग कुछ कर जाते हैं नेता जी।
संविधान पर खुद की व्याख्या गढ़ जाते हैं नेता जी।
बिजली पानी सड़क समस्या हल कर जाते नेता जी।
मंदिर मस्जिद गुरद्वारे में शीश नवाते नेता जी।
हर विकास हमने कर डाला कह जाते हैं नेता जी ।
चाहे खुद ना तुलते पर आदर्श बताते नेता जी।
वोट की खातिर उल्टा-पुल्टा बक जाते हैं नेता जी।
आते जाते रु़द्ध  रास्ता कर जाते हैं नेता जी।


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