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वर्ष: 2, अंक 34, अप्रैल(प्रथम), 2018



जिंदगानी की कहानी चाहिए


कृष्णा कुमारी ‘कमसिन’


 
किस्सों में राजा न रानी चाहिए,  
जिंदगानी की कहानी चाहिए।
 
दिन का राजा, रात रानी चाहिए,
फरवरी सी रुत सुहानी चाहिए।
 
दिल को थोड़ी ताज़गी महसूस हो, 
चीज कोई तो पुरानी चाहिए।
 
लहलहा उट्ठेगी फसलें वक़्त पर, 
बीज को बस खाद- पानी चाहिए।
 
झील, झरने, ताल, नदियां सब भले, 
किन्तु आँखों में भी पानी चाहिए।
 
बाद मुद्दत के ये तन्हाई मिली, 
इक गजल तो गुनागुनानी चाहिए।
 
सादगी महफूज बचपन में रहे, 
और जवानी में जवानी चाहिए।
 
दौड़ कर आयेंगे पंछी, देखना, 
छत पे दाना और पानी चाहिए।
 
भर नजर देंखूं में अपने आप को, 
कोई ‘कमसिन’ अपना सानी चाहिए।

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