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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 58, अप्रैल(प्रथम), 2019

मेरा दिल

इंदर भोले नाथ

तुम्हे चाहे कोई इतना इस जमाने में नहीं होगा मेरा दिल था मेरा दिल है मेरा दिल ही रहेगा सदा मेरे ख्वाहिश मेरे अरमाँ हुए फना जिस पे वो कातिल था वो कातिल है वो कातिल ही रहेगा सदा वो मौजों की रवानी है वो दरियाँ की तूफानी है मैं साहिल था मैं साहिल हूं मैं साहिल ही रहूंगा सदा अधूरा इश्क़ ने ही हमको काबिल बना डाला वो जाहिल था वो जाहिल है वो जाहिल ही रहेगा सदा


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