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Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 58, अप्रैल(प्रथम), 2019

होली की तरह दूसरे देशों में कौन से त्यौहार हैं

शशांक मिश्र भारती

भारत वर्ष में जिस तरह का उल्लास हर उम्र के लोगों में दिखायी पड़ता है।शायद ही कोई दूसरे पर्व में दिखे।पूरे देश में यह पर्व विभिन्न नामों से मनाया जाता है।सभी का सन्देश एक ही हैं मिलन भाईचारा और सांस्कृतिक मजबूती को प्राप्त करना।विविधता में एकता में यह पर्व भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

भारत की तरह दुनियां में बहुत सारे ऐसे देश हैं जिनमें होली से मिलते जुलते त्यौहार मनाये जाते हैं।होली की तरह ही उल्लास दिखता है।कहीं रंग कहीं पानी कहीं फूलों तो कहीं टमाटर का प्रयोग करते हैं।

न्यूजीलैंड वैसे तो यह माओरियों के लिए प्रसिद्ध देश है। पर यहां पर होली की तरह मनाया जाने वाला उत्सव वानाका है। जिसके लिए सभी बच्चे युवा और वृद्ध एक पार्क में एकत्रित होकर एक दूसरे के शरीर पर पेंटिंग करते हैं।आपस में खूब मस्ती होती है।बच्चों के लिए तो धमा चौकड़ी का दिन होता है।पूरे छः दिन तक यहां पर यह उत्सव चलता हैं। बुजुर्ग युवाओं और बच्चों का उत्साह वर्धन करने में कोई कसर बाकीं नहीं रखते।

थाईलैंड को सफेद हाथियों के देश के रूप में जाना जाता है। यहां पर होली की तरह एक त्यौहार प्रचलित है जिसको सोंगकरन पर्व कहते हैं। इसमें पानी से यहां के लोग खूब मस्ती करते हैं।इसके लिए यह लोग किसी तालाब के किनारे एकत्र होते हैं और एक दूसरे पर पानी फेंकते हैं। तो दो चार व्यक्ति पकड़कर किसी किसी की पानी में डुबकी भी लगाते हैं।क्या बूढ़े क्या बच्चे और क्या युवा सभी एक रंग में रंग जाते हैं दिन गाना और डांस करते है।एक दूसरे को शुभकामनायें देते हैं।

जापान की पहचान उगते सूर्य के देश के लिए है।पर यहां पर मनाया जाने वाला चेरी ब्लाबसम उत्सव होली की तरह ही है।यह यहां पर मार्च अप्रैल में मनाया जाता है। यहीं समय चेरी में फूल का होता है। लोग चेरी के बगीचे में बैठते हैं। एक दूसरे को बधाई देते हैं।साथ ही चेरी के पेड़ों से झरने वाली फूलों की पंखुड़िया इनका स्वागत अभिनन्दन करती हैं। दिन भर के इस उत्सव में विशेष भोजन नाचना और गाना भी होता है।

पीरू जोकि छोटा सा देश हैं यहां पर होली से मिलते जुलते पर्व को इनकान के नाम से जाना जाता है और यहां के निवासी टोलियां बना-बनाकर इस दिन पूरे शहर में घूमते हैं।हर टोली अपनी थीम के साथ नाच गाना करती है और यह दिखाने का प्रयास करती है कि वह श्रेष्ठ है। रात सब यहां के कुजको महल के सामने इकट्ठे होकर एक दूसरे को बधाई देते हैं खाने पीने का उत्साह भी रहता है।

चीन हमारा पड़ोसी देश इस उत्सव को पानी फेंकने के उत्सव के रूप में मनाता है। यहां पर यह उत्सव मार्च अप्रैल में होता है और विशेषकर चीन के युवान प्रान्त में इसका उल्लास दिखता है। इसे महात्मा बुद्ध के स्नान से भी जोड़ा गया है। नाम की बसत करें तो यहां का यह पानी फेंकने का उत्सव है। यहां के लोग एक दूसरे पर पानी ही नहीं फेंकते बल्कि एक दूसरे को बधाई भी देते हैं।

तिब्बत जिसको की हमारे शास्त्रों में त्रिविष्टप के नाम से जाना गया। हमारे सदियों से सांस्कृतिक और धार्मिक सम्बन्ध रहे।वहां पर होली की तरह का उत्सव गामारी जी के नाम से मनाया जाता है और यह लोग उस दिन नदी झीलों के किनारे तम्बू लगाते हैं।सभी स्नान कर स्नान पर्व का रूप दे देते हैं।इनकी मानयता है कि इस दिन नदी तालाब का जल शुद्ध शीतल मृदु हल्का और लाभकारी होता है।वह भी केवल गले के लिए और पेट के लिए बिल्कुल भी नहीं ।

इसके अलावा जहां जहां विविध माध्यमों से या समयों पर भारतीय गये हैं वह भारतीय परम्परा के अनुसार ही होली मनाते हैं।इनमें नेपाल, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, मारीशस, गुयाना, फिजी, ट्रिनीनाड प्रमुख हैं। यहां पर भारतीय बड़ी संख्या में हैं।अफ्रीका में सूर्य उत्सव के रूप में, अमरीका में मेडफों के रूप में, चेक स्लोवाक में कोनेन्से, हालैंड में कार्निवाल, बेल्जियम में मूर्ख दिवस और इटली में रेडिका के रूप में मनाया जाता है।जोकि कहीं न कहीं स्वरूप अलग होने के बाद भी होली जैसा ही होता है।

तो इस तरह से दूसरे देशों में होली की तरह के उत्सव प्रचलित हैं। भले ही समय और मनाने का तरीका अलग है। पर सभी हर्ष उल्लास के साथ-साथ किसी न किसी सन्देश को लिये ही हैं।


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