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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 58, अप्रैल(प्रथम), 2019

ममता

राजीव कुमार

’’ मम्मी, इस घर में दम घुटता है मेरा। ये घर अब काटने को दौड़ता है। इस घर की दिवारें अब अन्जान हो चुकी है। ’’

विक्की ने अपनी माँ से यह बात कही।

’’ मैं खुद बात करूंगी तुम्हारे पापा से। ’’ सुधा ने अपने बेटे से कहा और उसके कमरे की बल्ब बंद करके अपने विस्तर पर सोने चली गई। उसने सोचा कि विक्की के पापा गहरी नींद में सो रहे हैं। यही सोचकर सुबह में ही बात करना मुनासिब समझा। सुधा विस्तर पर करवटें बदल रही है। नींद भी नहीं आ रही है। सुधा ने आंखें बंद कर रखी है। धिरे से आवाज आई ’’ नींद नहीं आ रही है सुधा?’’

’’ आप अभी तक सोये नहीं? ’’

’’ जिसका बेटा ऐसी बहकी-बहकी बात कर रहा हो, उस पिता को नींद कैसे आ सकती है?’’

सुधा ने कमरे की बल्ब जलायी तो देखा कि पति की आंखे आंसुओं से तर -बतर है। सुधा भी अपने आंसु नहीं रोक पाई।

’’ ऐसा ठीक नहीं है, हमलोग सुबह बात करेंगे विक्की से। ’’ बोलकर सुधा अपने पति के पेट पर हाथ रखकर सो गई।

’’ देख विक्की, तुम्हारे पापा जो भी फैसला ले रहे हैं, तुम्हारी भलाई के लिए ही है।’’ विक्की के पापा सुरेश ने कुछ भी बोलना चाहा तो सुधा ने चुप रहने का इशारा कर उनको चुप करवा दिया।

’’ हमको अब किसी का नहीं सुनना है। बस जाना है तो जाना है।’’ बोलकर विक्की ने टेबल पर जोरदार मुक्का मारा।

’’ कल एक काम है, हो जाने के बाद परसो चला जाउंगा। ’’

विक्की के पापा ने सुधा से कहा ’’ तुम औरत जो प्यार करती हो, दुलार करती हो तो उसे ममता कहते हैं। हम पिता भी तो अपने बच्चों को प्यार करते हैं उसको क्या नाम मिलेगा?’’

सुधा इस समस्या का समाधान जल्दी ढंुढ लेना चाहती थी, मगर इस समस्या का समाधान के करीब आने की कोशिश करती, समस्या और विकराल रूप धारण कर लेती। विक्की बेहुदगी की सारी हदें पार करते हुए बोला ’’ मम्मी, आपको पापा और मुझ में किसी एक को चुनना पड़ेगा।’’

सुधा ने सिने पर तो पहले से ही दुःखों का पहाड़ आ गिरा था, लेकिन इस बात से सीने पर रखा पहाड़ सीने पे ही टुट गया। विक्की ने माँ को जवाब देने के लिए प्रेशर दिया तो जल्दीबाजी में जवाब दिया ’’ तुमको जहां जाना है जाओ, मैं तुम्हारे पापा के साथ ही रहुंगी।’’

सुधा ने यह बात बोल तो दिया लेकिन उसके मन मे क्या बीत रही थी, उससे बेहतर कोई नहीं जानता होगा। विक्की जब घर से निकलने लगा तो सुधा ने विक्की को एक जोरदार तमाचा मारते हुए कहा ’’ मैं अपने बेटे के बिना भी जिन्दा नहीं रह सकती।’’ चैखत पर जाकर खड़ी हुई।


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