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वर्ष: 2, अंक 20, सितम्बर(प्रथम), 2017



हक़ीक़त


सुशांत सुप्रिय


हथेली पर खिंची
टूटी जीवन-रेखा से
क्या डरते हो

साप्ताहिक भविष्य-फल में की गई
अनिष्ट की भविष्यवाणियों से
क्या डरते हो

कुंडली में आ बैठे
शनि की साढ़े-साती से
क्या डरते हो

यदि डरना है तो
                     अपने 'मैं' से डरो
                     अपने बेलगाम शब्दों से डरो
                     अपने मन के कोढ़ से डरो
                     अपने भीतर हो गई
                     हर छोटी-सी मौत से डरो
क्योंकि
                     उँगलियों में
                     'नीलम' और 'मूनस्टोन' की
                     अँगूठियाँ पहन कर
                     तुम इनसे नहीं बच पाओगे 		 
 

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