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वर्ष: 2, अंक 20, सितम्बर(प्रथम), 2017



एक आवाज़


सुशील शर्मा


 		 
मिल कर सब अन्यायों से अब लड़ बैठो।
अब सब मिल जाओ तन तन के यूं मत बैठो।

बीस बरस से भोग रहें है हम भैया।
अब तो न्याय दिला दो अब न यूं चुप बैठो।

शासन की कठपुतली तो सब कुई हैं।
तुम विरोध तो करलो गोदी में अब न बैठो।

एक विधायक बन गयो एक फिराक में है।
जो अध्यापक घर मे जा क्यों घुस बैठो।

जग्गू शिल्पी भैरव बिज्जू तुम सब सुन लो।
एक न भये तो भाड़ में तुम जा घुस बैठो।

संघ संघ मत खेलो ने तो मर जेहो।
अध्यापक गर गुस्सा हो के उठ बैठो।

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