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वर्ष: 2, अंक 23, अक्टूबर(द्वितीय), 2017



धड़कन


सुशील शर्मा


                                              
दिल की धड़कन का शबाब 
तुम तक पहुंचे तो कैसें।
मन की बातों का जबाब 
तुम तक पहुंचे तो कैसे।

जब से तेरी प्यारी प्यारी 
सूरत देखी है।
मेरे मन का गुलाब तुम 
तक पहुंचे तो कैसे।

जब जब भी तेरी गली 
से तेरी गुजरा हूँ।
मेरे प्यार की शराब 
तुम तक पहुंचे तो कैसे।

सारे खत पुस्तक में 
गुलाब से लिपटे हैं।
तुझ तक ये खत की 
किताब पहुंचे तो कैसे।

तेरे बिन अब ये 
जीवन सूना सूना है।
दिल का ये हिसाब 
तुझ तक पहुंचे तो कैसे।

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