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वर्ष: 2, अंक 23, अक्टूबर(द्वितीय), 2017



बहुत मुश्किल


संजीव ठाकुर


 
अज्ञात नहीं है कारण 
हमारे बीच 
सात समुद्र के होने का 
याद नहीं करना चाहता 
तैरने का सिद्धांत !

आकर खड़ी हो जाती हैं सामने 
कविताएँ
जो तुमने लिखवाई हैं 
और मैं पाता हूँ 
घड़ियाल ,
समुद्री साँप ,
शैवाल ,
और भी बहुत कुछ ...

सचमुच 
बहुत मुश्किल होगा 
पैदा होना किसी अगस्त्य का ,
किसी वामन का अवतार लेना 
सबसे बड़ा असंभव होगा 
मेरी डायरी के पन्नों से 
उन कविताओं को 
उखाड़ फेंकना 
जिनकी तुम जननी हो !

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