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वर्ष: 2, अंक 25, नवम्बर(द्वितीय), 2017



साहित्य और विज्ञान


सुशील शर्मा


 
जिस देश समाज का उन्नत होता है विज्ञान।
वह देश समाज उतनी ही होती है प्रकाशवान।
भारत में पारम्परिक विज्ञान।
आदि काल से है महान।
उतनी ही भाषा समृद्धवान।
साहित्य का विकास तभी संभव।
हो उसमें वैज्ञानिक सोच का उद्भव।
वैज्ञानिक सोच के नए तथ्य।
देते साहित्य को नया पथ्य।
प्रौद्योगिकी का हरदम विकास।
साहित्य को मिला नया आकाश।
इलेक्ट्रोनिक तकनीकी प्रवीणता
साहित्य को देती नवीनता।
इंटरनेट प्रौद्योगिकी का जाल।
देता साहित्य को नयी ताल।
अधुनातन तकनीक का आधार।
कर रहा है साहित्य का समुचित प्रसार।
साहित्य विधाओं का प्रस्तुतीकरण।
बनता रोचक रंजक मनोहरण।
विज्ञान ने विश्व को प्रमाण दिया
साहित्य ने विश्व को प्राण दिया।
कुछ क्षण में आपकी रचनाएँ।
बन जाती विश्व की कल्पनाएं।
विज्ञान और साहित्य का है अटूट सम्बन्ध।
अभिकलनात्मक भाषिकी का प्रबंध।
साहित्य बिना विज्ञान निष्प्राण।
विज्ञान बिना साहित्य  अप्रमाण।
दोनों का समुचित सानिध्य।
विश्व के विकास के लिए प्रतिबद्ध।
 

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