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वर्ष: 2, अंक 25, नवम्बर(द्वितीय), 2017



माँ को संबोधन


कमला घटोरा


माँ तुमको ही अब समय बदलना होगा ।
बहुत सहा नारी ने और नहीं सहना होगा ।

नये युग की नींव नई रखने को उठो माँ ,
परिवारों का बेढंगा कानून बदलना होगा ।

आने वाली बेटी का बेटे सा सत्कार हो
लिंग परीक्षण पर प्रतिबंध लगाना होगा ।

बेटी को संस्कारों की घुट्टी खूब पिलाई,
कुलदीपक को भी राह पे लाना होगा ।

देकर शिक्षा बेटी को अपना ही रूप दिया ,
सहना सिखाती आई ,पराये घर जाना होगा ।

पीछे रही क्यों बेटे को शिक्षा देने में तुम ,
करे न मनमानी वह उसे ,समझाना होगा।

 द्रुत गति से जो बेटे वाहन चलाते जाते हैं ,
उन के पथ का तुझे  'वैरियर' बनना  होगा।

अपने अरमानों का गला घोट घोट अब
नारी यूँ ही न जीये, जोश जगाना  होगा ।

माँ तुम को  ही समाज बदलना होगा ।
नये ढंग से बेटों को पोषित करना होगा ।

बहुत सहा नारी ने और नहीं सहना होगा ।..

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