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वर्ष: 2, अंक 29, जनवरी(द्वितीय), 2018



प्रेम के सिंदूरी रंग में
रंग लिया मुझको


रश्मि सिंह




मन में जगे सवालो को
शब्दो में पिरो दिया
की थोड़ा थोड़ा कर
तुझमे खुद को जी लिया
बैठी थी मैं जब 
सपनो के साहिल पर
सिंदूरी आसमां ने 
तुझमे मुझको रंग दिया
किस्सों और कहानियो में
राजा रानी का प्यार पढ़ा
पहाड़ो और नदियों का संगम सुना
हीर और रांझे का विछोह सुना
अधूरे इश्क़ की दास्ताँ
सबने बना डाली
रूह से रूह के मिलन 
को किसने देखा
की तूने प्रेम के सिंदूरी रंग में
रंग लिया मुझको
और मैंने भी
थोड़ा थोड़ा कर
तुझमे खुद को जी लिया 


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