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वर्ष: 2, अंक 29, जनवरी(द्वितीय), 2018



तैयारी


नरेन्द्र श्रीवास्तव


माँ
पुराने जेवर
पुरानी पेटी से
निकाल रही है
पिता
मैले थैले में से
रुपये निकालकर
गिन रहा है
बड़ा भाई
अभी-अभी अड्डे से
लौटा है
सुबह से गया था
खुश नजर आ रहा है
जरूर जेब भरी है
छोटा भाई
फोड़ी हुई माटी की गुल्लक से
फैले हुए पैसे
समेट रहा है
मुनिया
कोने में दुबकी
खामोश-सी
देख यही है सबों को
कल उसकी शादी है।

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