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वर्ष: 2, अंक 29, जनवरी(द्वितीय), 2018



नववर्ष की अनन्य शुभकामनाएं इस गीत की संगत में ---
नववर्ष की यही दुआएँ


कुमार रवीन्द्र


 
 

बंधु, हमारी    
नये वर्ष की यही दुआएँ

शाहों को सन्मति दे मौला 
परजा के सब कष्ट दूर हों 
बरकत हो घर में - आपस में 
नेह-प्यार के फिर शऊर हों      

रामराज की बातें 
सब जन सुनें-सुनाएँ   

अपनी माटी रहे उर्वरा 
नहीं संपदा हो उधार की  
सारी धरती  एक कुटुम हो 
मति-गति होवे सदाचार की 

भरे रहें घर -
प्रभुजी काटें सब विपदाएँ  

सपना देखा था पुरखों ने
कोई रहे न भूखा-नंगा
जात-धरम है एक मनुज का 
सोच यही हो - मन हो चंगा 

कभी न व्यापें 
पिछले युग की हमें बलाएँ 


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