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वर्ष: 2, अंक 29, जनवरी(द्वितीय), 2018



आओ, दिये हम जलाएँ


कमलेश यादव


 

आओ, दिये हम जलाएँ
मिल-जुल कर हँसे और मुसकुराएँ

प्रेम और सत्य की रोशनी से 
घर-आँगन जगमगाएँ

आँधी और तूफ़ानों में जीने का 
साहस जगायें

नई सुबह के नए सपने
देखे और दिखाएँ

जग का अंधियारा दूर करे
सबके सुख-दुःख अपनायें

दीवाली की ख़ुशियाँ हर घर में 
झूमें और झिलमिलाएँ

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